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NCERT Solutions for Class 8 Hindi पाठ 33 - पानी की कहानी

Class 8 Hindi Vasant Chapter 33, authored by Ramchandra Tiwari, unfolds the captivating narrative of water's journey. The prose eloquently explores the intricate process of dewdrop formation and delves into the mesmerizing tale of water's cyclical voyage. Tiwari skillfully elucidates the transformation of seawater into clouds, precipitation as rain, the creation of meandering streams, their convergence into rivers, and ultimately, the return of water to the vast sea. This literary piece not only captivates students with its poetic charm but also imparts a profound understanding of the scientific intricacies behind the natural phenomenon.

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पानी की कहानी

Question 1 :

लेखक को ओस की बूँद कहाँ मिली?

 

Answer :

लेखक को बेर की झाड़ी पर ओस की बूंद मिली।

 


Question 2 :

ओस की बूँद क्रोध और घृणा से क्यों काँप उठी?

 

Answer :

पेड़ों की जड़ों में निकले रोएँ द्वारा जल की बूंदों को जबरदस्ती धरती के भूगर्भ से खींच लाना व उनको खा जाना याद करते ही बूँद क्रोध व घृणा से काँप उठी।


Question 3 :

हाइड्रोजन और ऑक्सीजन को पानी ने अपना पूर्वज/पुरखा क्यों कहा?

Answer :

जब ब्रह्मांड में पृथ्वी व उसके साथी ग्रहों का उद्गम भी नहीं हुआ था उस समय ब्रह्मांड में हाइड्रोजन व ऑक्सीजन - दो गैस, सौरमंडल में लपटों के रूप में विद्यमान थीं। ऑक्सीजन व हाइड्रोजन के बीच रासायनिक क्रिया होने से दोनों का संयोग हुआ जिससे पानी का जन्म हुआ। इस वजह से बूंद ने इन दोनों को अपना पूर्वज या पुरखा कहा है।

 


Question 4 :

“पानी की कहानी के आधार पर पानी के जन्म और जीवन-यात्रा का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।

 

Answer :

पानी का जन्म (हद्रजन) हाइड्रोजन व (ओषजन) ऑक्सीजन के बीच रासायनिक प्रक्रिया के द्वारा होता है। जब ब्रह्मांड में पृथ्वी व उसके साथी ग्रहों का उद्गम भी नहीं हुआ था उस समय ब्रह्मांड में हाइड्रोजन व ऑक्सीजन - दो गैस, सौरमंडल में लपटों के रूप में विद्यमान थीं। किसी उल्कापिंड के सूर्य से टकराने से सूर्य के टुकडे हो गए। उन्हीं टुकड़ों में से एक टुकड़ा पृथ्वी रूप में उत्पन्न हुआ और इसी ग्रह में ऑक्सीजन व हाइड्रोजन के बीच रासायनिक प्रक्रिया हुई और दोनों के संयोग से पानी का जन्म हुआ। सर्वप्रथम बूंद वाष्प के रूप में पृथ्वी के वातावरण में ईर्द-गिर्द घूमती रही, तत्पश्चात ठोस बर्फ के रूप में विद्यमान हो जाती है। समुद्र से होती हुई वह गर्म-धारा से मिलकर ठोस रूप को त्यागकर अंत में जल का वेश धारण कर लेती है।

 


Question 5 :

कहानी के अंत और आरंभ के हिस्से को स्वयं पढ़कर देखिए और बताइए कि ओस की बूँद लेखक को आपबीती सुनाते हुए किसकी प्रतीक्षा कर रही थी?

 

Answer :

कहानी के अंत और आरंभ के हिस्से को पढ़कर यह पता चलता है कि ओस की बूँद लेखक को आपबीती सुनाते, हुए सूर्योदय की प्रतीक्षा कर रही थी।

 


Question 6 :

समुद्र के तट पर बसे नगरों में अधिक ठंड और अधिक गरमी क्यों नहीं पड़ती?

 

Answer :

समुद्र के तट पर बसे नगरों में अधिक ठंड और अधिक गरमी नहीं पड़ती क्योंकि वहाँ के वातावरण में हमेशा नमी रहती है।

 


Question 7 :

पेड़ के भीतर फव्वारा नहीं होता तब पेड़ की जड़ों से पत्तो तक पानी कैसे पहुँचता है? इस क्रिया को वनस्पति शास्त्र में क्या कहते हैं।

Answer :

पेड़ के भीतर फव्वारा नहीं होता तब पेड़ की जड़ों से पत्तो तक पानी पहुँचता है क्योंकि पेड़ की जड़ों वतनों में जाइलम और फ्लोएम नामक वाहिकाएँ होती हैं जो पानी को जड़ों से पत्तियों तक पहुँचाती हैं। इस प्रक्रिया को वनस्पति शास्त्र में संवहन' (ट्रांसपाईरशन) कहते हैं।

 


भाषा की बात

Question 1 :

किसी भी क्रिया को पूरी करने में जो भी संज्ञा आदि शब्द संलग्न होते हैं, वे अपनी अलग-अलग भूमिकाओं के अनुसार अलग-अलग कारकों में वाक्य में दिखाई पडते हैं; जैसे-“वह हाथों से शिकार को जकड़ लेती थी।

जकड़ना क्रिया तभी संपन्न हो पाएगी जब कोई व्यक्ति (वह) जकड़नेवाला हो, कोई वस्तु शिकार) हो जिसे जकड़ा जाए। इन भूमिकाओं की प्रकृति अलग-अलग है। व्याकरण में ये भूमिकाएँ कारकों के अलग-अलग भेदों; जैसे - कर्ता, कर्म, करण आदि से स्पष्ट होती हैं।

अपनी पाठ्यपुस्तक से इस प्रकार के पाँच और उदाहरण खोजकर लिखिए और उन्हें भलीभाँति परिभाषित कीजिए।

 

Answer :

1. आगे एक और बूंद मेरा हाथ पकड़कर ऊपर खींच रही थी।

  • पकड़कर - सबंध कारक

2. हम बड़ी तेजी से बाहर फेंक दिए गए।

  • तेज़ी से - अपादान कारक

3.  मैं प्रतिक्षण उसमें से निकल भागने की चेष्टा में लगी रहती थी।

  • मैं - कर्ता

4. वह चाकू से फल काटकर खाता है।

  •  चाकू से - करण कारक

5. बदलू लाख से चूड़ियाँ बनाता है।

  • लाख से - करण कारक

 


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